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PNB फ्रॉड केस ने लिया एक रोमांचक मोड़ इससे जुड़े लोगो के पासपोर्ट निलंबित

हीरा कारोबारी नीरव मोदी और बिजनेस में उनके पार्टनर मामा मेहुल चोकसी का पासपोर्ट चार हफ्ते के लिए निलंबित कर दिया गया है. दोनों ही व्यापारियों पर 11 हजार 400 करोड़ का घोटाला करने का आरोप लगा है.

ईडी, आईटी और सीबीआई ताबड़तोड़ इन दोनों के कई ठिकानों पर छापेमारी कर रही है. इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि नीरव मोदी न्यूयॉर्क के एक होटल में हैं. हालांकि जब विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से नीरव मोदी की लोकेशन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह हमारे किसी भी अधिकारी के संपर्क में नहीं है और अब तक उनकी लोकेशन की भी जानकारी नहीं मिल पाई है.

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PM मोदी ने बच्चों की परीक्षा पर चर्चा करते हुए दियें महत्वपूर्ण टीप्स

पहली बार 'परीक्षा पर चर्चा' कार्यक्रम के जरिए छात्रों से सीधा संवाद कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बच्चों के पेरेंट्स की जमकर क्लास ली. दरअसल, देशभर के छात्रों ने पेरेंट्स की अपेक्षाओं को लेकर छात्रों ने जिस तरह से सवाल किए उससे लगा कि वो इनसे परेशान हैं.

छात्रों ने पूछा- हर माता-पिता डॉक्टर या इंजीनियर ही बनाना चाहते हैं. हमारे रुचि किस चीज में है इसके बारे में नहीं सोचते. क्या ये सही है?  जिसपर मोदी ने कहा कि 'लगता है मुझे आज पेरेंट्स की क्लास लगानी पड़ेगी.

दिल्ली में 'मेकिंग एग्जाम फन: चैट विद पीएम मोदी' में प्रधानमंत्री ने कहा, सवाल स्टूडेंट भर का नहीं है. मां-बाप भी कुछ इसी तरह के सवाल कर रहे हैं कि बच्चों को समझाओं. उनकी मानसिकता सही नहीं है.

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भारतीय सनिको द्वारा LOC पर 2018 की अब तक की कार्यवाही में 20 पाकिस्तानी सेनिक मारे गये

भारत और पाक के बीच गहरे होते तनाव का सीधा असर दोनों देशों की सीमा पर भी देखा जा रहा है जहां पर लगातार दोनों तरफ से फायरिंग और जानें जा रही है समाचार एजेंसीयों ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि नियंत्रण रेखा के पास भारतीय सेना की कार्रवाई में इस साल अब तक कम से कम 20 पाकिस्तानी रेंजर्स मारे गए हैं जबकि कई घायल हुए हैं.

समाचार एजेंसीयों के मुताबिक,  जम्मू कश्मीर के पीर पांजाल रेंज में नियंत्रण रेखा के पार घुसपैठ की फिराक में बैठे करीब 180 से 200 आतंकियों की खुफिया रिपोर्ट के बाद सेना की तरफ से घाटी में निगरानी और बढ़ा दी गई है. दक्षिणी पीर पंजाल रेज में जो इलाके आते हैं वो है- पूंछ ,राजौरी और  मेंढर.

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सिमटती किसान राजनीति

हम जैसे छोटे लोग जो महीने के 15-20 दिन किसानों के साथ रहते हैं, कुछ राज्यों को छोड़ अन्य स्थानों के किसानों में समर्थन मूल्य की उत्सुकता नहीं पाते। आप बिहार, बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ वगैरह घूम लें। गुजरात भी घूम लें। आपको न्यूनतम समर्थन मूल्य  के विषय मे उत्सुकता देखने को नहीं मिलेगी। वहीं पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान, खासकर बड़े किसानों में न्यूनतम मूल्य बढ़ाने को लेकर सजगता और जानकारी ज्यादा देखने को मिलती है।

फिर किसानों पर काम कर रहे सरकारी और विपक्षी नेतागण राशन पानी लेकर सिर्फ कर्जमाफी, न्यूनतम समर्थन मूल्य और फसल बीमा जैसे मुद्दों तक ही क्यों सिमटे होते हैं? क्यों किसान की बुनियादी जरूरतों पर बात करने से परहेज करते हैं।

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कृषि और किसान अलग नहीं

आज ऋण माफी और किसानों को नकद सहूलियतें देने की बातें जोर पकड़ती जा रही हैं। यह भी कहा जा रहा है कि उसको दिया तो इसको क्यों नहीं। एक भीड़ को पछाड़ने दूसरी भीड़ तैयार है। दूसरी को रौंद तीसरी आगे बढ़ना चाहती है। कोई सर पे गन्ने का गट्ठर लाद विरोध का तमाशा कर रहा है तो कोई रंग बिरंगे मिट्टी के बर्तनों में अनाज भर करतव दिखा रहा है। कइयों को लगता है जैसे उन्हें अपना खोया वजूद वापस मिल गया हो। उत्सव सा माहौल है। कई समूह कुम्भ सी तैयारी कर जैसे आनन फानन डुबकी लगा और शंखनाद कर, बिना लड़े चुनाव जीतने का स्वपन देखने लगे हैं। उधर सत्ता के हाथ खजाना है। वो भी पूरी उदारता से सार्वजनिक पूंजी को व्यक्तिगत दान के रूप में लुटाने को तत्पर है। दीर्घकालिक प्रभावी योजनाओं की जगह लेमनचूस के कारखाने खोले जा रहे हैं। दुर्भाग्य है कि ये लेमनचूस भी सिर्फ मध्यम और बड़े किसान ही ले पा रहे हैं। मगर पक्ष विपक्ष दोनों अपनी सहूलियतों के अनुसार झंडू बाम कार्यक्रम पर अग्रसर है।