आज राफेल पर फिर हुई सुनवाई, सुप्रीमकोर्ट ने मांगे जो राफेल उड़ाते उन देशों के नाम

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राफेल सौदे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं पर आज अहम सुनवाई हो रही है. अदालत राफेल सौदे की कीमत और उसके फायदों की जांच करेगी. केंद्र ने पिछली सुनवाई में 36 राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत और उसके फायदे के बारे में कोर्ट को सीलबंद दो लिफाफों में रिपोर्ट सौंपी थी.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ की पीठ इस मामले में अहम सुनवाई कर रही है. जिसमें याचिकाकर्ता भी दलीलें देंगे. याचिकाकर्ताओं ने सौदे की अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है.

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि हमने राफेल पर दाम की जानकारी साझा कर दी है, लेकिन इसको रिव्यू करना एक्सपर्ट का काम है. इसको न्यायपालिका रिव्यू नहीं कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के कहने पर एयरफोर्स के दो बड़े अफसर अदालत में पहुंचे. एयर मार्शल वी. आर. चौधरी, कमांडर इन चीफ ईस्टर्न कमांड आलोक खोसला कोर्ट में मौजूद हैं. सुप्रीम कोर्ट के जजों ने एयरफोर्स के अधिकारियों से कई सवाल पूछे.

जस्टिस जोसेफ ने पूछा कि पुराना RFP जून 2015 में वापस ले लिया गया था और नया RFP पेंडिंग था. तो प्रधानमंत्री ने कैसे डील को अनाउंस कर दिया?

AG ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमें एक ऐसी फैक्ट्री चाहिए थी, जो भारत में 108 एयरक्राफ्ट टाइम पर बना सकें.HAL ये काम पूरा करने की सक्षम नहीं थी. हमें उनकी जरूरत थी, जो सही तरीके से इन सभी का निर्माण कर सके. कोर्ट ने कहा कि डील में टेक्नोलॉजी के ट्रांसफर की बात भी थी, जिसपर AG ने कहा कि HAL के पास कुशल लोग नहीं थे.

AG ने कोर्ट को बताया कि वेंडर के पास ही ऑफसेट पार्टनर चुनने की छूट थी. वेंडर ने जो पार्टनर चुना, उसे फ्रांस सरकार ने भी मंजूरी दी है.CJI ने इसपर कहा कि जब फॉर्मेट में कहा गया है कि आपको डिटेल्स देनी हैं, तो आप ये नहीं कह सकते हैं कि उन्होंने डिटेल नहीं दी.

रक्षा मंत्रालय के एडिशनल सेकेट्ररी ने कोर्ट को बताया कि 2014 में जो बदलाव किए गए थे, वह 2015 में मंजूर हुए थे. अगर हथियार बनाने वाली कंपनी ऑफसैट डिटेल्स देती हैं, तो हम भी दे सकती हैं. अगर डिटेल्स नहीं आती हैं तो ऑफसेट का रिस्क बढ़ सकता है.

AG ने कहा कि गाइडलाइंस में ये नहीं लिखा है कि ऑफसेट पार्टनर भारत की तरफ से ही चुना जाएगा. ये जरूरी नहीं कि कंपनी को ऑफसेट पार्टनर की जानकारी शुरू में रक्षामंत्रालय को देनी हो, ये जानकारी ऑफसेट क्रेडिट के समय भी दी जा सकती है.

CJI ने सरकार से पूछा कि कौन-से देश हैं जो राफेल उड़ाते हैं. जिसके बाद सरकार ने कहा कि फ्रांस, कतर और मिस्त्र हैं जो राफेल उड़ाते हैं. एजी ने कहा कि फ्रांस की सरकार की तरफ इसपर कोई गारंटी नहीं दी गई है. हालांकि, बाद में लेटर ऑफ कम्फर्ट दिया गया था.CJI ने पूछा कि क्या सरकार के पास इन विमानों की कोई गारंटी है, जिसपर AG ने कहा कि नहीं ऐसा नहीं है.

राफेल पर सुनवाई के दौरान AG ने कहा कि आज हमारी वायुसेना काफी कमजोर है, अगर एयरफोर्स कारगिल के समय में मजबूत होती तो हम इतने जवान नहीं गंवाते. अटॉर्नी जनरल के इस बयान पर चीफ जस्टिस ने कहा कि कारगिल 1999 में हुआ था और राफेल 2014 में आया है, इसलिए ऐसी बातें ना करें.

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा है कि वह रक्षा मंत्रालय का पक्ष नहीं सुनना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि कोई एयरफोर्स का अधिकारी आए और अपनी जरूरतों को बताया है. अटॉर्नी जनरल ने CJI को कहा कि कुछ ही मिनटों में एयरफोर्स का अधिकारी आ रहा है.

जस्टिस जोसेफ ने पूछा कि क्या नए विमान जो आएंगे वह पुराने विमान जैसे ही हैं. जिसपर सरकार ने कहा है कि नए विमानों में काफी कुछ नया होगा.CJI ने पूछा कि नए विमान में क्या होगा, क्या पब्लिक को बताया गया है. तो सरकार ने इससे इनकार किया.

जस्टिस जोसेफ ने पूछा कि जब Request for proposal (RFP) अप्रैल 2015 में वापस ले लिया गया था और नया RFP जारी नहीं हुआ तो डील कैसे साइन हुई. चीफ जस्टिस ने कहा कि क्या डील के लिए RFP जरूरी होता है, जिसपर AG ने जवाब दिया कि ऐसा जरूरी नहीं है.

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