
संसद के मॉनसून सत्र के आखिरी दिन कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी में आर-पार की लड़ाई चल रही है. सरकार की ओर से संशोधित तीन तलाक बिल को पेश कर पास करने की जोर आजमाइश की जा रही है, तो वहीं कांग्रेस की अगुवाई में समूचा विपक्ष इसका विरोध कर रहा है.
शुक्रवार जब संसद की कार्यवाही शुरू हुई कांग्रेस ने राफेल का मुद्दा उठाया और जबरदस्त हंगामा किया. इसके बाद कई विपक्षी दलों ने तीन तलाक बिल पेश किए जाने का विरोध किया. हंगामे के चलते राज्यसभा को दोपहर 2.30 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया.
गुरुवार को ही मोदी कैबिनेट ने इस बिल में संशोधन किए हैं, जिसके बाद अब ये बिल पास होने की उम्मीद जताई जा रही है. बता दें कि इससे पहले कांग्रेस ने इस बिल में कई तरह की कमियां बताई थीं, जिसके बाद बिल को संशोधित किया गया है.
टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि शुक्रवार को प्राइवेट बिलों पर चर्चा होती है, ऐसे में सरकार तीन तलाक बिल कैसे ला सकती है. उनके अलावा भी आनंद शर्मा, रामगोपाल यादव ने बिल पेश करने का विरोध किया. सरकार ने इस दौरान राज्यसभा में संशोधित बिल की कॉपी सदस्यों को बांटी.
इस मामले में राज्यसभा में महाराष्ट्र से कांग्रेस सांसद हुसैन दलवई के बयान पर विवाद छिड़ गया है. दलवई ने कहा कि शक के आधार पर राम ने भी सीता को छोड़ा था. हर धर्म में पुरुषों का वर्चस्व है तो ऐसे में इस्लाम पर ही सवाल क्यों?
तीन तलाक बिल पर रणनीति को लेकर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने संसदीय कार्य मंत्री अनंत कुमार के दफ्तर में एक बैठक बुलाई. जिसमें अमित शाह, अनंत कुमार के अलावा कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद मौजूद रहे. इसके बाद भी अमित शाह ने केंद्रीय मंत्रियों के साथ विपक्ष को साधने की रणनीति पर बैठक की.
गौरतलब है कि गुरुवार को ही राज्यसभा में उपसभापति के चुनाव हुए हैं, इस चुनाव में एनडीए के हरिवंश सिंह ने बड़ी जीत हासिल की है. यही कारण है कि एनडीए की स्थिति अभी मजबूत नज़र आ रही है. ऐसे में केंद्र सरकार चाहेगी कि सत्र का अंत होते हुए वह तीन तलाक जैसे महत्वपूर्ण बिल को पास करवा पाए.