बजट सत्र में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दिया भाषण ...

707

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने सोमवार को अभिभाषण के साथ बजट सत्र 2018 की शुरुआत की. उन्होंने मोदी सरकार की उपलब्धियों और योजनाओं की जानकारी देते हुए कई मुद्दों का जिक्र अपने भाषण में किया. भाषण में तील तलाक बिल से लेकर गरीबों के लिए उठाए जा रहे कदमों पर सरकार का पक्ष रखा गया . इस भाषण में इन्होने पुरे सत्र कि योजनाओं को धियं में रखते हुए कहा .

 सभी भारतीयों ने हाल ही में पोंगल, बिहु, लोहड़ी, मकर संक्रांति और वसंत पंचमी के उत्सव मनाए हैं. गणतंत्र दिवस भी एक प्रमुख उत्सव है. इस वर्ष के गणतंत्र दिवस समारोह में, दस आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासन प्रमुखों की उपस्थिति ने, ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की हमारी दीर्घदृष्टि में एक विशेष आयाम जोड़ा.

2018 का वर्ष नए भारत के सपने को साकार करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. विश्वास है कि यहां उपस्थित देश के कोने-कोने से आए सभी जनप्रतिनिधि, देश की विकास की इस महान यात्रा को और गति देने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे.

संविधान शिल्पी बाबा साहेब डॉक्टर भीम राव आंबेडकर कहा करते थे कि सामाजिक और आर्थिक लोकतंत्र के बिना राजनीतिक लोकतंत्र स्थायी नहीं हो सकता. कमजोर वर्गों के लिए समर्पित मेरी सरकार, संविधान में निहित इसी मूलभावना पर चलते हुए देश में सामाजिक न्याय तथा आर्थिक लोकतंत्र को सशक्त करने और आम नागरिक के जीवन को आसान बनाने के लिए कार्य कर रही है.

शायद ही किसी ने सोचा हो कि शौचालय निर्माण भी सामाजिक न्याय की इस भावना को बढ़ाने में सहायक होगा. शौचालयों के निर्माण से महिलाओं की गरिमा ही नहीं बचती बल्कि उन्हें सामाजिक न्याय का एहसास भी होता है. सामाजिक न्याय का ये आंदोलन दिन प्रतिदिन और व्यापक होता जा रहा है. सबका दायित्व है कि जब 2019 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मनाई जाए, तब तक हम देश को पूरी तरह स्वच्छ बनाकर पूज्य बापू के प्रति अपनी सच्ची श्रद्धा व्यक्त करें.

इस सदन में मेरे जैसे बहुत से लोग हैं जिन्होंने वर्षों तक स्वयं देखा है कि महिलाओं को किस तरह लकड़ी बीनकर चूल्हे पर खाना बनाना पड़ता था. महिलाओं और उनके बच्चों के पास धुएं भरी सांस लेने के सिवाय कोई और विकल्प नहीं था. इस वजह से वे अनेक बीमारियां और कष्ट सहन करते थे. ऐसी गरीब महिलाओं को ‘प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना’ ने सुविधा संपन्न महिलाओं से बराबरी करने का अवसर दिया है और सामाजिक न्याय के एक अनदेखे पक्ष का समाधान किया है. अब तक इस योजना के तहत 3 करोड़ 30 लाख से ज्यादा गैस कनेक्शन दिए जा चुके हैं.

Add comment


Security code
Refresh