
ताजा जानकारी के मुताबिक यूपी में हुए निकाय चुनाव में जहां बैलेट पेपर का प्रयोग हुआ है, वहां विपक्ष बीजेपी पर भारी पड़ा है. भलें ही बीजेपी ने मेयर के पद पर अपना दबदबा कायम रखा है. पार्टी ने 16 सीटों में से 14 सीटों पर जीत दर्ज की है.
लेकिन जब नगर पालिका और नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए चुनावी नतीजों का आकलन किया गया, तो नतीजें चौकाने वाले नजर आए. यूपी में नगर पालिका के 5261 वार्डों में चुनाव हुए, जिनमें से बीजेपी के सिर्फ 17.51% उम्मीदवार ही जीत पाए.
जबकि विपक्ष बीजेपी पर भारी नजर आया. भारी ही नहीं बल्कि बुरी तरफ से बीजेपी को पछाड़ दिया. सबसे ज्यादा 62.21% वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है.
इसके बाद नगर पंचायत की बात की जाए तो यहाँ बीजेपी का प्रदशर्न और भी ख़राब रहा है. नगर पंचायत सदस्य के लिए 5446 वार्ड में चुनाव हुए और इनमें से 664 पर ही भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार जीतने में कामयाब रहे.
यानी बीजेपी को नगर पंचायत के 12.22% वार्डों में जीत मिली. नगर पालिका परिषद सदस्य और नगर पंचायत सदस्यों का कुल आंकड़ा देखा जाए तो करीब 15 फीसदी वार्डों पर ही बीजेपी के उम्मीदवारों को जीत मिली है.
पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने पार्टी को बंपर जीत की बात बोलने से पहले शायद नतीजें अच्छी तरफ से देखे नहीं थे.
वहीं दूसरी तरफ मायावती ने बीजेपी पर EVM में छेड़छाड़ का आरोप लगाते हुए? चुनाव को बैलेट पेपर से कराने की मांग की. यूपी में सम्पन्न हुए विधानसभा के चुनाव के नतीजे के बाद भी मायावती ने ईवीएम से छेड़छाड़ का ही आरोप लगाया था.
बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने बीजेपी को घेरते हुए कहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव से लेकर विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ईवीएम से छेड़छाड़ की थी. इसलिए बीजेपी सत्ता में आई. ऐसा कहा मायावती ने/
वहीं दूसरी तरफ यूपी के निकाय चुनाव में भी कानपुर के एक वार्ड में ईवीएम छेड़छाड़ का मामला सामने आया है. वहां पर EVM का कोई भी बटन दबाने पर लाइट बीजेपी के चुनाव निशान पर जलती थी.
इसके बाद मशीन को वहां से हटा दिया गया था. और जो वोट डाल चुके थे. उनसे दुवारा से मतदान करवाया गया था. जब कानपुर के उसी वार्ड के लोगों से बात की? तो उनका कहना है कि बीजेपी इसी तरह यूपी और देश में घोटाला करके आई है.