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यूपी पुलिस में पैसा देकर एनकाउंटर करवाने का सच

प्रमोशन, पैसा और पब्लिसिटी...ये तीनों हासिल करने के लिए उत्तर प्रदेश के सारे नहीं, तो कुछ पुलिस अधिकारी शार्ट कट के तौर पर फर्जी मुठभेड़ों का रास्ता अपनाने के लिए भी तैयार लगते हैं. इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच के दौरान पाया कि योगी सरकार के कार्यकाल के दौरान मुठभेड़ों में मरने वालों का आंकड़ा 60 से ऊपर पहुंच गया है.

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2017 से अब तक उत्तर प्रदेश पुलिस की ओर से की गई करीब 1500 मुठभेड़ों में 400 के आसपास लोग घायल हुए हैं.   

इंडिया टुडे की स्पेशल इंवेस्टीगेशन टीम की जांच से सामने आया कि यूपी पुलिस के कुछ सदस्य झूठे मामलों में निर्दोष नागरिकों को फंसा रहे हैं और फिर उन्हें फर्जी मुठभेड़ों में शूट कर रहे हैं. ये सब तरक्की और दूसरों से पैसा लेकर किसी को ठिकाने लगाने के इरादे से किया जा रहा है.

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भारतीय सेना को जल्द ही मिलेंगी 400 नई तकनीकी से लेस तोपें

भारतीय सेना को इस समय 400 से भी ज्यादा तोपों की जरूरत है. इसमें वो आधुनिक तोपें शामिल हैं जिन्हें भारत-पाकिस्तान और चीन की सरहद पर तैनात किया जाएगा. ये हर मौसम में कारगर तोप हैं जिन्हें अत्यधिक ऊंचाई से लेकर रेगिस्तान या फिर पहाड़ से लेकर बर्फीले पहाड़ों पर तैनात किया जाएगा.

भारतीय सेना के बेड़े में शामिल हो रही सभी तोपें मेक इन इंडिया के तहत तैयार की जा रही हैं. भारतीय सेना को 145 तोपों को मिलने की प्रक्रिया में तेजी लाने को कहा गया है. मई 2018 में धनुष 155/45 कैलिबर वाली तोप का यूजर ट्रायल पोखरण में हो चुका है. आर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड को कहा गया है कि 114 तोपों को जल्द तैयार करके भारतीय सेना को सुपुर्द करे.

के-9 वज्र 155 एमएम /52 कैलिबर की होवित्जर तोप है. इसे साउथ कोरिया तैयार करके 100 की संख्या में भारतीय सेना को देगा. इसीलिए मेक इन इंडिया के तहत एलएनटी कंपनी पार्टनरशिप के तहत 2019 नवंबर तक इसे तैयार करके देगी. पहली 10 तोप नवंबर 2018 तक आनी है. इसके बाद 40 तोप 2019 के नवंबर महीने तक और उसके बाद 2020 तक भारतीय सेना को मिलेंगी.

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चुनाव से पहलें मोदी सरकार का ब्लैकमनी पर रिपोर्ट कार्ड

साल 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान नरेंद्र मोदी का सबसे बड़ा वादा यही था कि उनकी सरकार आई तो वह विदेशी बैंकों में जमा पूरा काला धन वापस लेकर आएंगे. उन्होंने कहा था कि अगर यह धन वापस आ जाए तो गरीबों को वैसे ही 15-15 लाख मिल जाएंगे.

नरेंद्र मोदी ने कहा था, 'हम विदेशी बैंकों में जमा एक-एक रुपया वापस लेकर आएंगे और यह सुनिश्चित करेंगे कि इसका इस्तेमाल गरीबों की बेहतरी के लिए किया जाए.'

अब जब एक साल के भीतर देश फिर से चुनावों का सामना करने जा रहा है, अब यह जांच करने का समय आ गया है कि मोदी सरकार काले धन के वादे पर कितना खरा उतरी है.

असल में कुल मिलाकर देखें तो पिछले चार साल में करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये के काले धन का पता चला है. आइए देखते हैं मोदी सरकार ने काले धन पर अंकुश के लिए पिछले चाल साल में क्या कदम उठाए और अलग-अलग मामलों में क्या हैं आंकड़े...

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मोदी सरकार ने लोकसभा में पेश किया SC/ST संशोधन विधेयक

SC/ST एक्ट के मुद्दे पर दलित समुदाय की नाराजगी झेल रही मोदी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. मोदी सरकार ने शुक्रवार को लोकसभा में एससी\एसटी संशोधन विधेयक 2018 (SC/ST Prevation Atrocity Act Amendment Bill) पेश किया. ये वही बिल है जिसके तहत SC/ST एक्ट अपने पुराने मूल स्वरूप में आ जाएगा.

बता दें कि इसी साल 21 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (एससी/एसटी एक्ट 1989) के तहत दर्ज मामलों में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी थी. कोर्ट ने फैसला देते हुए कहा था कि सरकारी कर्मचारियों की गिरफ्तारी सिर्फ सक्षम अथॉरिटी की इजाजत के बाद ही हो सकती है.

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ दो अप्रैल को दलित संगठन सड़कों पर उतरे थे. दलित समुदाय ने दो अप्रैल को 'भारत बंद' किया था. केंद्र सरकार को विरोध की आंच में झुलसना पड़ा. देशभर में हुए दलित आंदोलन में कई इलाकों में हिंसा हुई थी, जिसमें एक दर्जन लोगों की मौत हो गई थी.

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बैलट पेपर से चुनाव कराने की मांग को लेकर, 17 विपक्षी दल चुनाव आयोग से मिलेंगे

2019  लोकसभा चुनावों से पहले विपक्षी दल एक तरफ केंद्र की मोदी सरकार को हराने के लिए महागठबंधन का खांका खींच रहे हैं. वहीं, इन चुनावों को ईवीएम के बजाय बैलट पेपर से कराने की मांग भी जोर पकड़ रही है.

इसी सिलसिले में 17 विपक्षी दलों का एक प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलेगा. दिलचस्प यह है कि इन दलों में केंद्र और महाराष्ट्र सरकार में बीजेपी की सहयोगी शिव सेना भी शामिल है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अगले हफ्ते 17 विपक्षी दलों की बैठक होनी तय है. जिसमें ईवीएम से चुनाव कराए जाने के बजाय बैलट पेपर से कराने की मांग पर चर्चा होगी. जिसके बाद इन 17 दलों का प्रतिनिधिमंडल चुनाव आयोग से मिलकर अपना ज्ञापन सौंपेगा.