
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को अपने एक अहम फैसले में आम आदमी पार्टी (आप) को बड़ी राहत देते हुए चुनाव आयोग के फैसले को पलट दिया है. लाभ के पद के मामले में चुनाव आयोग ने 19 जनवरी को 20 विधायकों की सदस्यता रद कर दी थी, लेकिन आज के फैसले में कोर्ट ने आयोग के फैसले को बदलते हुए विधायकों की सदस्यता बहाल कर दी.
जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस चंद्रशेखर की बेंच ने 28 फरवरी को चुनाव आयोग और विधायकों की ओर से बहस पूरी करने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था.
आप को बता दे कि इस फैसले पर खुशी व्यक्त करते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर इसे सत्य की जीत बताया. दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली के लोगों को न्याय दिया. दिल्ली के लोगों की यह बड़ी जीत है. दिल्ली के लोगों को बधाई.
फैसले के बाद चुनाव आयोग ने कोर्ट के फैसले पर किसी भी तरह से प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है और उसका कहना है कि फैसले पर अध्ययन करेंगे. दूसरी ओर, इस फैसले के बाद आप पार्टी में जश्न का माहौल बन गया है.
हाईकोर्ट के फैसले से पहले विधायक अलका लांबा ने कहा कि उन्हें कोर्ट का फैसला मंजूर होगा. फैसला आने पर पार्टी अगले कदम का रुख तय करेगी. हम लोग राजनीति करने नहीं आए. फैसला आने के बाद वह बेहद खुश नजर आईं.
विधायकों की दलील थी कि कथित लाभ के पद को लेकर उन्हें अयोग्य घोषित करने का चुनाव आयोग का फैसला गैरकानूनी है. आयोग ने उन्हें उनका पक्ष रखने का मौका नहीं दिया, जबकि चुनाव आयोग की दलीलें थीं कि उन्होंने विधायकों को अपना पक्ष रखने का पर्याप्त समय दिया.
आप को बता दे कि 24 फरवरी को दिल्ली हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 20 विधायकों को अयोग्य घोषित करने संबंधी केंद्र सरकार की अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. 19फरवरी को आयोग ने राष्ट्रपति को विधायकों को आयोग्य घोषित करने की सिफारिश भेजी थी जिस पर राष्ट्रपति ने अपनी मोहर लगा दी थी