समाजसेवी अन्नास हजारे शुक्रवार से जन लोकपाल और किसानों के मुद्दे को लेकर अनशन पर

200

समाजसेवी अन्नान हजारे शुक्रवार से एक बार फिर अनशन की राह पर हैं. अन्नाे रामलीला मैदान में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं. हालांकि उनकी प्रमुख मांगों में अभी भी लोकपाल विधेयक को पारित कराना शामिल है. 
लेकिन इसके अलावा भी वो 6 अन्य. मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं. अन्नाक से हड़ताल से पहले कहा कि, 'मैंने सरकार को 42 बार पत्र लिखा. मगर सरकार ने नहीं सुनी. अंत में मुझे अनशन पर बैठना पड़ा.
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एवं कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त एन संतोष हेगड़े आंदोलन में शामिल होने रामलीला मैदान पहुंचे. अन्ना  ने भूख हड़ताल की शुरुआत से पहले मंच से तिरंगा लहराया. इसके बाद अनिश्चि तकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत हो गई.
राजघाट में प्रार्थना करने के बाद अन्नाक हजारे शहीदी पार्क पहुंचे. अन्नां हजारे राजघाट पहुंचे. महात्माक गांधी को श्रद्धांजलि दी और प्रार्थना भी की. किसानों के कृषि उपज की लागत के आधार पर डेढ़ गुना ज्याादा दाम मिले.

खेती पर निर्भर 60 साल से ऊपर उम्र वाले किसानों को प्रतिमाह 5 हजार रुपए पेंशन. कृषि मूल्य आयोग को संवैधानिक दर्जा तथा सम्पूर्ण स्वायत्तता मिले. लोकपाल विधेयक पारित हो और लोकपाल कानून तुरंत लागू किया जाए.

लोकपाल कानून को कमजोर करने वाली धारा 44 और धारा 63 का संशोधन तुरंत रद्द हो. हर राज्य में सक्षम लोकायुक्त की नियुक्त  किया जाए. चुनाव सुधार के लिए सही निर्णय लिया जाए. 

सरकार का धूर्त रवैया सही नहीं: अन्नार

अन्ना  हजारे ने अनशन की शुरुआत से पहले केंद्र सरकार को संबोधित करते हुए कहा- 'प्रदर्शनकारियों को दिल्लील लेकर आ रही ट्रेन आपने कैंसिल कर दी. आप उन्हेंत हिंसा की ओर धकेलना चाहते हैं. मेरे लिए भी पुलिस बल तैनात कर दिया गया. मैं कई पत्र लिखे और कहा था कि मुझे सुरक्षा नहीं चाहिए. आपकी सुरक्षा मुझे बचा नहीं सकती. सरकार का धूर्त रवैया सही नहीं है.

सांसदों की सैलरी बढ़ाने पर अन्नास हजारे ने कहा, उनकी सैलरी क्यों  बढ़नी चाहिए? वो जनसेवक हैं. वो संसद में काम भी नहीं करते. संसद की कार्यवाही में केवल व्यवधान पैदा करते हैं. मैं भी सरकारी कर्मचारी रहा हूं, लेकिन कभी किसी सुविधा की मांग नहीं की. क्यों कि मैं लोगों की सेवा कर रहा था. ये सैलरी का पैसा किसानों को मिलना चाहिए.
बता दें, अन्नाम हजारे लोकपाल विधेयक को पारित कराने की मांग लंगे समय से करते रहे हैं. इसको लेकर उन्होंने 2011 में रामलीला मैदान में ही भूख हड़ताल भी की थी. इस दौरान उनके साथ अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, कुमार विश्वाीस और मनीष सिसोदिया जैसे साथी थे. हालांकि अभ तब इनके इस अनशन में शामिल होने की सूचना नहीं है. अन्नार कहना है कि इस बार का अनशन 2011 से भी बड़ा होगा