अब मुज्जफरनगर दंगो के केस भी वापिस लेनें की तैयारी में योगी सरकार

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आप को बता दे कि मुज्जफरनगर में हुए दंगे की बात एक बार फिर चर्चा में है, क्योंकि अब बीजेपी नेताओं की तरफ से दंगों के दौरान दर्ज मुकदमे वापस लेने की मांग उठने लगी है. योगी आदित्यनाथ ने अपने पार्टी नेताओं का इसका आश्वासन भी दिया है.

जानकारी सामने आ रही है कि योगी आदित्यनाथ सरकार पिछली अखिलेश सरकार के दौरान हुए मुजफ्फरनगर दंगो में आरोपी करीब चार सौ लोगों पर दर्ज मुकदमे वापस ले सकती है.

जानकारी के मुताबिक योगी आदित्यनाथ से मुजफ्फरनगर के सांसद संजीव बाल्यान समेत करीब 10 खपा बीजेपी नेताओं ने इस संबंध में सीएम योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की है और फर्जी मुकदमों के बारे में नाराजगी जताते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की है.

वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इन लोगों को कानूनी राय लेने के बाद मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने का आश्वासन दिया है. अब यह बात स्पष्ट है कि जिन लोगो के खिलाफ केस है, उनके केसों को सरकार वापस लेने के लिए तैयार है.

संजीव बाल्यान के आरोपों के मुताबिक दंगों के दौरान कुल 402 फर्जी मुकदमे दर्ज किए गए. बाल्यान के मुताबिक, इन मुकदमों में 856 निर्दोष लोगों को फंसाया गया. इनमे 9 मुकदमे ऐसे थे, जिसमें 100 महिलाओ समेत 250 लोगों को आरोपी बनाया गया.

आरोप ये भी है कि पूर्व सरकार ने लोगों को फंसाने के लिए केवल वोटर लिस्ट देखकर ही मुकदमे दर्ज कर दिए. गौरतलब है कि मुजफ्फर नगर दंगो के दौरान कुल 502 मुकदमे दर्ज किये गए थे जिसमे 6867 लोग आरोपी बताये गये थे.

इससे पहले 5 जनवरी को सरकार की तरफ से जिलाधिकारी को पत्र लिखा गया था, जिसमें सरकार ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगा केस में बीजेपी नेताओं के खिलाफ अदालत में लंबित 9 आपराधिक मामलों को वापस लेने की संभावना पर सूचना मांगी थी. हालांकि, पत्र में नेताओं के नाम का जिक्र नहीं था, लेकिन उनके खिलाफ दर्ज मामलों की फाइल संख्या लिखी गई है.

बता दें कि समाजवादी पार्टी की अखिलेश सरकार के दौरान पश्चिमी यूपी के मुजफ्फरनगर में भीषण दंगा हुआ था. मुजफ्फरनगर और आसपास के इलाकों में अगस्त-सितंबर 2013 में हुए सांप्रदायिक दंगे में 60 लोग मारे गए थे और 40 हजार से अधिक लोग बेघर हुए थे.