सैन्य मदद रोकें जानें पर पाक ने कहा भारत की जुबान बोल रहा है अमेरिका

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अमेरिका में ट्रंप सरकार ने आतंक को पनाह देने वाले पाकिस्तान पर सख्त कार्रवाई  करते हुए उसको मिलने वाली सभी सुरक्षा मदद पर रोक लगा दी है. ट्रंप सरकार ने गुरुवार को साफ कहा कि पाकिस्तान द्धारा अपनी जमीन पर पनपने वाले आतंकी नेटवर्क पर कोई कार्रवाई न करने से वे निराश हैं.

इधर, ट्रंप के ट्वीट और सैन्य मदद रोके जाने से बौखलाए पाक ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान में अपनी असफलता के लिए अमेरिका पाकिस्तान को बलि का बकरा बना रहा है. 

पाकिस्तानन के विदेश मंत्री ख्वा.जा आसिफ ने कहा कि ट्रंप का हालिया बयान दिखाता है कि वो भारत की जुबान में बात कर रहे हैं.

बता दे कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्वीट करते हुए कहा था कि पिछले 15 साल में अमेरिका ने पाक को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता दी है. इसके बावजूद पाकिस्तान आतंकियों का सुरक्षिकत पनाहगाह बना हुआ है.

अमेरिका ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान जब तक अपने यहां मौजूद हक्कानी नेटवर्क और अफगान तालिबान के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं करता है. तब तक पाकिस्तान को किसी भी तरह कोई मदद नहीं दी जायगी.

इस रोक में सभी सुरक्षा संबंधी फंड और मिलिट्री साजो-सामान का ट्रांसफर भी शामिल होगा, हालांकि इसमें कुछ अपवाद हो सकते हैं. अब देखना यह है कि पाकिस्तान अब भी आतंक के खिलाफ कोई कार्यवाहीं करता है या नहीं?

इसके अलावा अमेरिका ने धार्मिक आजादी के मामले में भी पाकिस्तान को स्पेशल वाच लिस्ट में रखा है. क्योंकि उसका यह मानना है कि पाकिस्तान में धार्मिक आजादी का घोर उल्लंघन हो रहा है.

समाचार एजेंसी रायटर्स और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया में आई खबरों के मुताबिक यह सहायता पर पूरी तरह से रोक ही है और इस कार्यक्रम में फिलहाल किसी भी बदलाव का कोई इरादा नहीं दिखाई दे रहा है. 

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हीदर नावएर्ट ने इसकी घोषणा की,  हालांकि उन्होंने यह विवरण नहीं दिया कि कुल कितनी राशि के फंड को रोका जाएगा.

उन्होनें कहा कि यह रकम काफी ज्यादा है. हालांकि अमेरिकी प्रशासन ने यह भी कहा है कि पाकिस्तान द्वारा आतंकी नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई हुई तो यह मदद फिर से दी जा सकती है.


गौरतलब है कि इसके पहले ट्रंप प्रशासन ने करीब 25.5  करोड़ डॉलर की सहायता राशि यह कहकर लटका दी थी कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ ज्यादा सख्ती दिखानी होगी. 

पाकिस्तान और अमेरिकी प्रशासन के बीच रिश्ते पिछले साल गर्मियों से तब से बिगड़ने लगे, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान हिंसा और आतंक के एजेंटों का सुरक्षिंत पनाहगाह बन गया है. एक अनुमान के अनुसार साल 2002 से अब तक अमेरिका पाकिस्तान को 33 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद कर चुका है.